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Maro He Jogi Maro: Gorakh Vani

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Language
hindi
Format
PDF
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4 MB (4580953 bytes)
Pages
\466
Time added
2021-10-24 01:08:56

Description

हसिबा खेलिबा धरिबा ध्यानं अज्ञात की पुकार सहजै रहिबा अदेखि देखिबा मन मैं रहिणा साधनाः समझ का प्रतिफल एकांत में रमो आओ चांदनी को बिछाएं, ओढ़ें सुधि-बुधि का विचार ध्यान का सुगमतम उपायः संगीत खोल मन के नयन देखो इहि पस्सिको मारिलै रे मन द्रोही एक नया आकाश चाहिए सिधां माखण खाया नयन मधुकर आज मेरे सबद भया उजियाला उमड़ कर आ गए बादल उनमनि रहिबा सरल, तुम अनजान आए

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