HINDI

Jin Sutra

Book information

Language
hindi
Format
PDF
Filesize
7 MB (7753060 bytes)
Volume
2
Pages
\656
Time added
2021-11-24 08:26:55

Description

सत्य के द्वार की कुंजीः सम्यक-श्रवण यात्रा का प्रारंभ अपने ही घर से ज्ञान है परमयोग किनारा भीतर है जीवन ही है गुरु करना है संसार, होना है धर्म ध्यान का दीप जला लो प्रेम है द्वार प्रेम का आखिरी विस्तारः अहिंसा दुख की स्वीकृतिः महासुख की नींव समता ही सामायिक ज्ञान ही क्रांति गुरु है मन का मीत जीवन तैयारी है, मृत्यु परीक्षा है त्वरा से जीना ध्यान है गुरु है द्वार ध्यान है आत्मरमण मुक्ति द्वंद्वातीत है ध्यानाग्नि से कर्म भस्मीभूत गोशालकः एक अस्वीकृत तीर्थंकर छह पथिक और छह लेश्याएं पिया का गांव षट पर्दों की ओट में आज लहरों में निमंत्रण चौदह गुणस्थान प्रेम के कोई गुणस्थान नहीं पंडितमरण सुमरण है रसमयता और एकाग्रता त्रिगुप्ति और मुक्ति एक दीप से कोटि दीप हों याद घर बुलाने लगी

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